अपने पैशन को पहचाने।

आज से कुछ वर्ष पहले लोग अपने क्षमता, काबिलियत को बखूबी जानते थे। वो क्या कर रहे हैं, क्या गलत है, क्या सही है, क्या नही करना चाहिए, ये सब पता होता था। लेकिन वर्तमान में सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि अभी के नव युवक अपने काबिलियत को नही पहचानते। बच्चो को लगता है की जो हो रहा है उसे होने दो। मतलब उनको कुछ फर्क ही नहीं पड़ता। नव युवक अपने जिमेदारी से भटक चुके है, उनको क्या करना है कुछ पता ही नही, कोई पूछे कि बेटा आगे क्या करोगे उनको कुछ पता ही नही होता, मोहल्ले के शर्मा जी का लड़का, अगर इंजीनियर कर रहा है तो वो भी बोलेगा हमे आगे इंजीनियर करनी है। उसे पता ही नही होता की वो क्या बोल रहा है। लेकिन शर्मा जी का लड़का कर रहा है तो उसका देख के वो भी। सबसे बड़ी लाफरवाही माता पिता की होती है, बचपन से ही सिखाने लग जाते है की बेटा इंजीनियर करेगा। अरे पहले उसे ठीक से बोलने, चलने का सीखने दो, बाद में उसका जो पैशन है वो करेगा। माता पिता को ध्यान देना चाहिए कि बेटा को किस चीज को करने में ज्यादा रुचि है। और उसी में उसको सपोर्ट करना चाहिए। 

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